Hello दोस्तों आपलोगो ने अक्सर कही सारे संत के बारे में सुना या जाना होगा जो अलग अलग नाम से जाने जाते है, लकिन दोस्तों आपलोग santh Kabir के बारे में जरूर से सुना होगा। दोस्तों आज में आपलोगो को उन्ही के बारे में बताने वाला हु। उन्होंने अपने जीवन में दोहे में माधयम से हमलोगो को जो बताया है आज में आपको वो सब बतऊँगा। तो दोस्तों चलिए में आपको Kabir Das Ke 10 Dohe Hindi Mein बता देता हु।
संत कबीर दास की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ
दोस्तों कबीर दास हमारे भारतीय संत परंपरा के एक ऐसे जाने-माने आज संत हैं, जिन्होंने अपने दोहे से आज भी इतने प्रशंसिक है, जीतने की आज से सेकड़ो वर्ष पहले थे। Kabir Das Ke 10 Dohe Hindi Mein न केवल हमें भक्ति का मार्ग दिखाता है, बल्कि हमारे जीवन की हर एक गहरी से गहरी सच्चाई, आत्मज्ञान और अहंकार का बोध भी करता है।
दोस्तों कबीर दास जी ने हमें एक सरल भाषा में गहरी बात बताता है। उनके दोहे सीधे हृदय को छूते हैं और आत्मा को झकझो कर रखते देते हैं। दोस्तों आज के इस ब्लॉक में हम संत कबीर दास के Top 10 प्रसिद्ध दोहे के बारे में बताएंगे और हम यह भी जानने का प्रयास करेंगे कि हमारे दैनिक जीवन में कैसे हम इस दोहे की मदद से हम अपने जीवन का मार्गदरशक बन सकते हैं।
Kabir Das Ke 10 Dohe Hindi Mein – अर्थ और व्याख्या
1. गुरु की महिमा
दोहा:
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय।
बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो मिलाय॥
अर्थ : जब गुरु और भगवान दोनों एक साथ सामने हों, तो पहले गुरु के चरणों में नमन करना चाहिए, क्योंकि गुरु ही हमें ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग दिखाते हैं।
व्याख्या: Kabir Das Ke 10 Dohe Hindi Mein यह दोहा गुरु की महानता को दिखाता है। दोस्तों संत कबीर का मानना है कि बिना गुरु के ईश्वर की प्राप्ति संभव नहीं है। गुरु अज्ञान के अंधकार को दूर करते हैं,और ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। आज भी यह दोहा उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि सही मार्गदर्शन के बिना जीवन भटक सकता है। गुरु की वाणी न सिर्फ आध्यात्मिक, बल्कि जीवन के हर हिस्से में मार्गदर्शन करते हैं। यह दोहा हमें विनम्रता, कृतज्ञता और श्रद्धा का पाठ सिखाता है।
2. अहंकार पर प्रहार
दोहा:
जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं।
सब अंधियारा मिट गया, जब दीपक देख्या माहिं॥
अर्थ : जब तक अहंकार था, तब तक ईश्वर का अनुभव नहीं हुआ। अहंकार के मिटते ही ईश्वर का साक्षात्कार हो गया।
व्याख्या: दोस्तों का यह दोहा हमें अहंकार त्यागने की शिक्षा देता है। कबीर दास हमें यह बताने का प्रयास कर रहे कि ‘मैं’ यानी अहंकार ही ईश्वर प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधा है। आज के आधुनिक जीवन में अहंकार, दिखावा और प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ गई है। यह दोहा हमें आत्ममंथन करने को प्रेरित करता है कि जब तक हम अपने भीतर के अहं को नहीं छोड़ेंगे, तब तक सच्ची शांति संभव नहीं है। इसी प्रकार दोस्तों आत्मज्ञान का दीपक जलते ही जीवन का अंधकार समाप्त हो जाता है।
3. सच्ची भक्ति
दोहा:
पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥
अर्थ: केवल किताबें पढ़ने से कोई ज्ञानी नहीं बनता, जो प्रेम को समझ ले वही सच्चा पंडित है।
व्याख्या : दोस्तों संत कबीर दस का यस दोहा हमें सच्चे ज्ञान और भक्ति का सार बताता है। कबीर दास कहते हैं कि शास्त्रों का ज्ञान तब अधूरा है, जब तक उसमें प्रेम नहीं है। आज के समय में लोग बाहरी ज्ञान पर ज्यादा ध्यान देते हैं, लेकिन प्रेम, करुणा और संवेदना को भूल जाते हैं। यह दोहा हमें सिखाता है कि प्रेम ही सबसे बड़ा ज्ञान है और वही हमें ईश्वर के निकट ले जाता है।
4. निंदा का महत्व
दोहा:
निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय॥
अर्थ : निंदक को अपने पास रखें, क्योंकि वह बिना कहे ही हमारे दोषों को दूर कर देता है।
व्याख्या: Kabir Das Ke 10 Dohe Hindi Mein में से यह दोहा आत्म-सुधार का एक अनोखा संदेश देता है। कबीर दास मानते हैं कि आलोचना हमें बेहतर इंसान बनाती है।आज हम निंदा से डरते हैं, लेकिन कबीर इसे आत्मशुद्धि का एक साधन मानते हैं. यदि हम आलोचना को सकारात्मक तरीके से लें, तो यह हमारे जीवन को निखार सकती है।
5. समय का महत्व
दोहा:
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥
अर्थ: जो काम कल करना है, उसे आज करो और जो आज करना है, उसे अभी करो।
व्याख्या : दोस्तों यह दोहा हमें बहुत ही सरल लेकिन गहरे मानवीय भाव के साथ यह सिखाता है, कि जीवन में सबसे बड़ी भूल काम को टालते रहना है, क्योंकि हम अक्सर यह मानकर चलते हैं कि कल समय मिलेगा, हालात बेहतर होंगे या मन अपने आप तैयार हो जाएगा, जबकि सच्चाई यह है कि जीवन हर पल बदल रहा है और किसी को नहीं पता कि अगला क्षण हमारे पास होगा भी या नहीं, इसलिए कबीर दास हमें झकझोरते हुए कहते हैं कि जो काम कल के भरोसे छोड़ा गया है उसे आज पूरा करो और जो आज करना जरूरी है उसे अभी कर डालो, क्योंकि समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता, चाहे वह भक्ति हो, अच्छा कर्म हो, किसी अपने से क्षमा मांगनी हो, किसी से प्रेम प्रकट करना हो या आत्म-सुधार की शुरुआत करनी हो।
हम सब सोचते हैं कि बाद में कर लेंगे, लेकिन यह “बाद में” अक्सर कभी नहीं आता, और जब जीवन अचानक कोई मोड़ ले लेता है तब मन पछतावे से भर जाता है कि काश उस समय सही निर्णय ले लिया होता, यही कारण है कि यह दोहा हमें वर्तमान में जीना सिखाता है, जागरूक बनाता है और यह समझाता है कि हर सांस एक अवसर है, जिसे यदि हमने आज नहीं पहचाना तो कल शायद मौका ही न मिले, इसलिए कर्म, भक्ति और सत्य के मार्ग पर चलने का सबसे सही समय केवल और केवल अभी है।
6. बाहरी आडंबर नहीं, मन की शुद्धता
दोहा:
माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका छोड़ दे, मन का मनका फेर॥
अर्थ : मनुष्य ने जीवन भर माला तो फेरी, लेकिन मन को नहीं बदला; हाथ की माला छोड़कर मन की माला फेरनी चाहिए।
व्याख्या: दोस्तों संत कबीर दास हमें यह बताने का प्रयास करते हैं, कि वह कहते हैं केवल माला जपना, मंदिर जाना या धार्मिक दिखावा करना इन सब चीजों का करना ही सिर्फ भक्ति नहीं होता है। अगर हम अपने भीतर बैठे अहंकार, लालच, क्रोध, द्वेष को नहीं त्यागे तो तो हमें भक्ति का कोई लाभ नहीं मिलेगा। सच्चा भक्त वही होता है जो मन को शुद्ध करके और सकारात्मक विचारों को अपने अंदर प्रेम और करुणा भाव से भगवान को प्रेम भाव से मानता है वही सच्ची भक्ति का हकदार होता है। दोस्तों कबीर दास हमें यह एहसास करते हैं, कि भगवान कहीं नहीं हमारे भीतर ही है,और जब मन बदलता है, तभी जीवन भी बदलता है।
7. सुख और दुख में ईश्वर स्मरण
दोहा:
दुख में सुमिरन सब करें, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे को होय॥
अर्थ: दुख के समय हर कोई भगवान को याद करता है, लेकिन सुख में कोई नहीं करता; जो सुख में भी स्मरण करे, उसे दुख क्यों होगा?
व्याख्या: दोस्तों Kabir Das Ke 10 Dohe Hindi Mein से इसमें मनुष्य की आदत पर प्रकाश डालते हैं। जब जीवन में परेशानी आती है, तब हम तुरंत भगवान को याद करने लगते हैं, लेकिन जैसे ही सुख, धन और सुविधा मिलती है, हम ईश्वर को भूल जाते हैं। सच्ची भक्ति वही है जो हर परिस्थिति में बनी रहे। जो व्यक्ति सुख के समय भी ईश्वर को याद करता है, वह अहंकार से बचा रहता है और उसका मन शांत रहता है। दोस्तों यही मन की शांति आने वाले दुखों को सहने की शक्ति देती है।
8. विवेक और समझदारी
दोहा:
साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।
सार-सार को गहि रहे, थोथा देई उड़ाय॥
अर्थ: साधु या सज्जन व्यक्ति को सूप की तरह होना चाहिए, जो अच्छे को संभाल ले और बेकार को अलग कर दे।
व्याख्या: दोस्तों कबीर दास हमें इस दोहे में विवेक का महत्व बताते हैं। वे हमें यह कहते हैं कि मनुष्य को बिना सोचे-समझे सब कुछ स्वीकार नहीं करना चाहिए। जैसे धुप अनाज को बचाता है और भूसे को उड़ा देता है, हमें भी जीवन में अच्छी बातों, अच्छे लोगों और अच्छे संस्कारों को अपनाना चाहिए और बुरी आदतों, नकारात्मक विचारों और गलत क्रियाओं को छोड़ देना चाहिए। यही विवेक व्यक्ति को सही रास्ते पर ले जाता है और संत कबीर भी हमें यही उपदेश देते है।
9. आत्ममंथन की सीख
दोहा:
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥
अर्थ: जब मैं दूसरों में बुराई ढूँढने निकला, तो कोई बुरा नहीं मिला; लेकिन जब अपने दिल में देखा, तो खुद से बुरा कोई नहीं लगा।
व्याख्या: दोस्तों कबीर दास इस दोहे में हमें आत्म चिंतन का संदेश देते हुए यह महसूस करते हैं, कि हम अक्सर लोगों के बारे में ज्यादा विचार करने लगते हैं। और उनकी गलतियों को उन्हें गिनाने में लगे रहते हैं। हम चिंतन में हम लगे रहते हैं लेकिन हम एक बार भी यह नहीं विचार करते हैं कि हम दूसरों की गलतियों को ना देखकर हम अपनी कमियों को देखें। जब इंसान ईमानदारी से अपने भीतर झांकता है, तब उससे यह दिखाता है कि असली वास्तविकता क्या है। कबीर दास हमें यह सिखाता है, कि दूसरों को बदलने से पहले खुद को बदलना बहुत ही जरूरी है क्योंकि आत्म सुधार से ही जीवन में सच्चा परिवर्तन आता है।
10. समभाव और मानवता
दोहा:
कबीरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर।
ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर॥
अर्थ: कबीर कहते हैं कि वे संसार के बीच खड़े होकर सबका भला चाहते हैं, न किसी से मित्रता रखते हैं और न किसी से बैर।
व्याख्या: इस दोहे में कबीर दास हमें यह बताने का प्रयास करते हैं, कि वह हमें सच्चे संत के गुणों के बारे में बताते हैं। वह हमें यह कहते हैं, कि एक सच्चा इंसान वही है जो समाज में रहते हुए भी किसी से द्वेष हिंसा अहंकार ना रखें और सभी के कल्याण की कामना करें। जब मनुष्य सरल और करुणा में बंध जाता है तभी हो सच्चे अर्थों में आध्यात्मिक कहलाता है। कबीर दास हमें इस दोहे के माध्यम से यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि प्रेम शांति और मानवता का मार्गदर्शन ही असली मानवता है।
कबीर दास के 10 दोहे PDF
दस्तो में निचे एक PDF File Attach कर रहा हु छाए तो उसको खोल के सरे दोहे एक साथ देख सकते है। ये दोहे हमें समय का महत्व, अहंकार से मुक्ति, सच्ची भक्ति, आत्म-सुधार और मानवता का मार्ग दिखाते हैं। यदि आप कबीर दास की वाणी को शांति, समझ और प्रेरणा के साथ पढ़ना चाहते हैं, तो यह PDF आपके लिए उपयोगी और मार्गदर्शक सिद्ध होगी।
निष्कर्ष :
संत कबीर दास के दोहे हमें सरल शब्दों में जीवन की गहरी सच्चाइयाँ समझाते हैं। ये दोहे दिखावा छोड़कर सच्चाई, प्रेम और आत्म-सुधार का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देते हैं। यदि हम इनके भाव को अपने जीवन में उतार लें, तो हमारा जीवन अधिक शांत, संतुलित और सार्थक बन सकता है। तो दोस्तों मैंने आपको Kabir Das Ke 10 Dohe Hindi Mein में सरल भाषा में बता दिया हु। आशा करता हु, की आपको सरे दोहे समाज में आ गए होंगे। thanku.
