Hello दोस्तों भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है, क्योंकि वे बहुत ही सरल और सहज भाव से की गई पूजा से भी शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। Shivling Par Jal Chadhane Ki Vidhi सनातन धर्म की एक अत्यंत प्राचीन और प्रभावशाली पूजा परंपरा है। दोस्तों आज में इस Topic के बारे में बतऊँगा की कैसे आप सही तरीको से Shivling पर जल चढ़ा के अपने जीवन में सकारात्मक लाभ प्राप्त कर सकते है।
शिव कौन है
दोस्तों भगवान शिव को सिर्फ जानना है ही नहीं बल्कि अनुभव करने का विषय है। हम लोग भगवान शिव को भगवान के रूप में पूछते हैं,लेकिन हम यह नहीं जानते कि भगवान शिव एक तरफ हमारे जीवन का भाव है एवं कल्याण करने का मार्गदर्शन भी है। दोस्तों कहा जाता है जहां शांति है, संतुलन है और सच्चाई है वही शिव है।
दोस्तों हम लोग भगवान शिव को आदि अनंत के रूप में जानते हैं और शिव को सृष्टि का आरंभ और अंत दोनों को मानते हैं। वह किसी एक रूप आकार में बंदे नहीं है बल्कि वे आनेको रूपों में हमारे आसपास ही हैं। उनके गले का विश् दर्शाता है कि दूसरों की पीड़ा अपने ऊपर लेकर भी संसार की रक्षा करता है।शिव हमें डर नहीं, साहस देते हैं। वे कहते हैं कि बाहर नहीं, भीतर झाँको। जब मन शांत होता है, अहंकार मिटता है और सत्य दिखाई देता है — वही शिव का सच्चा रूप है।
Shivling Par Jal Chadhane Ki Vidhi ke Visestaye
दोस्तों हमारे शास्त्रों में हमें इस बात का निर्देश दिया गया है, कि अगर हम शिवलिंग पर सही तरीकों से जल चढ़ाएं तो हमारे जीवन के अनेकों कष्ट, मानसिक तना, नकारात्मक ऊर्जा जैसे अनेक प्रकार के ऊर्जा धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं। इसी प्रकार अगर हम पूजा क नियमों एवं श्रद्धा के साथ नहीं किया जाए तो इसका पूर्ण रूप से कोई फल प्राप्त नहीं होता है। इसके अलावे ये भी कहा जाता है कि शिवरात्रि के दिन भी शिवलिंग पड़ जल चढ़ाने से काफी लाभ प्राप्त होता है। इसलिए दोस्तों आज हम आपको Shivling Par Jal Chadhane Ki Vidhi के बारे में पूर्ण रूप से बताएंगे और यह भी समझने का प्रयास करेंगे की कैसे आप सही नियम एवं श्रद्धा को अपना के इसका पूर्ण लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
शिवलिंग पर जल चढ़ाने की पूरी प्रक्रिया
नियम :
दोस्तों आप अगर शिव की कृपा पूर्ण रूप से प्राप्त करना चाहते हैं तो मैं आपको सबसे पहले उनके नियम के बारे में Step By Step बता देता हूं -:
सबसे पहले दोस्तों आपको सुबह प्रातः काल उठना पड़ेगा। दोस्तों कहा जाता है कि प्रातः काल उठने से आप उस समय के एनर्जी को महसूस कर सकते हैं और अपने मन को शांत कर सकते हैं। दोस्तों प्रातकाल उठना के बाद आप स्नान करें एवं स्नान करने के बाद अपने मन को शांत करके सबसे पहले आप भगवान शिव का ध्यान करें। दोस्तों ध्यान हो जाने के बाद अब आप अपने पूजा को आरंभ कर सकते हैं। दोस्तों पूजा को आरंभ करने से पहले आप पूजा में लगने वाले सारे जरूर सामग्री को एकत्रित कर ले।
पूजा में लगने वाले मुख्य समंग्री :
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शिवलिंग (पत्थर या पारद शिवलिंग)
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शिवलिंग आधार (जलाधारी सहित)
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शुद्ध जल
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गंगाजल
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तांबे / पीतल का लोटा
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पूजा थाली
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आसन (कुश या कपड़े का)
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दूध
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दही
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शहद
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घी
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चीनी या मिश्री
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पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर का मिश्रण)
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बेलपत्र (त्रिदल वाला)
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सफेद फूल (धतूरा फूल हो तो उत्तम)
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अक्षत (साबुत चावल)
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धतूरा फल
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भांग
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धूप
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दीपक (तेल या घी का)
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कपास की बत्ती
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कुमकुम / रोली
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चंदन
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अगरबत्ती
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फल (केला, सेब, नारियल आदि)
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मिठाई (बर्फी, लड्डू या घर की बनी)
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पंचमेवा (यदि उपलब्ध हो)
Note:
दोस्तों Shivling Par Jal Chadhane Ki Vidhi में जो भी सामग्री बताया हु वो सब भगवान शिव के पूजा में लगने वाली सारी सामग्री हैं। उसको अगर आपके पास इन सारी सामग्रियों की व्यवस्था न हो तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। भगवान शिव इतने दयालु हैं, कि अगर आप इन सारी सामग्रियों को एकत्रित न कर पाए तो आप सिर्फ उन्हें जल, बेलपत्र और ओम नमः शिवाय मंत्र से ही आप पूर्ण रूप से उनकी पूजा कर सकते हैं। भगवान शिव इन से भी प्रसन्न होते हैं। दोस्तों ध्यान रहे आप प्लास्टिक के बर्तन का उपयोग न करें एवं बेलपत्र को आप टूटे हुए या खंडित अवस्था में ना चढ़ाएं।
शिव पूजा मंत्र अर्थ और महत्व सहित
दोस्तों भगवन शिव के मंत्र न केवल मंत्र होते है बल्कि एक महसूस करने वाले ऊर्जा होते है। जब हम श्रद्धा और सही उच्चारण के साथ शिव मंत्र का जप करते है तो मन, शरीर और आत्मा तीनो को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। दोस्तों वैसे शिव के अनेको मंत्र है पर में आपको कुछ मुख्य मंत्रो के बारे में बतऊँगा जो काफी महत्वा प्रदान करता है।
ॐ नमः शिवाय (पंचाक्षरी मंत्र)
मंत्र:
ॐ नमः शिवाय
अर्थ : दोस्तों इस मंत्र में हम भगवन को नमन को करते है और भगवन को जल चढ़ाते समय इस मंत्र का उच्चारण करते है। दोस्तों यह मंत्र पंचतत्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) का संतुलन करता है।
महामृत्युंजय मंत्र :
मंत्र:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
अर्थ: यह मंत्र जिसे हम महामृत्युंजय मंत्र के नाम से जानते हैं, भगवान शिव को समर्पित है और इसे सबसे ताकतवर मंत्रों में से एक माना जाता है। शिव को यहाँ त्र्यंबक कहकर पुकारा गया है, यानी वो जो तीन आँखों से भूत, वर्तमान और भविष्य को देखते हैं। जब हम कहते हैं “सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्,” तो इसका मतलब है कि शिव हमारे जीवन में सकारात्मकता, स्वास्थ्य और शक्ति को सुगंध की तरह फैलाते हैं।
इस मंत्र का सुंदर भाव यह है कि जैसे पका हुआ फल आसानी से बेल से अलग हो जाता है, वैसे ही हम भी दुख, भय और बंधनों से मुक्त हो सकें। यहाँ मृत्यु से मुक्ति का मतलब सिर्फ शारीरिक मृत्यु से नहीं है, बल्कि यह डर, बीमारी, नकारात्मक सोच और अज्ञान से भी आजादी की बात करता है। इस मंत्र का जाप करने से मन को गहरी शांति मिलती है और एक सुरक्षा का एहसास होता है। अगर इसे श्रद्धा से नियमित रूप से दोहराया जाए, तो यह आत्मबल को बढ़ाता है और जीवन के कठिन समय में सहारा बनता है।
शिवलिंग पर जल चढ़ाने का आध्यात्मिक महत्व
दोस्तों Shivling Par Jal Chadhane Ki Vidhi का महत्व एक समान प्रक्रिया नहीं होता है, बल्कि इसका सरल संबंध हमारे भीतर बैठे चेतना और आत्मा से मिलित होता है। दोस्तों शिवलिंग को हम इस ब्रह्मांड की ऊर्जा का प्रतीक मानते हैं और जब भक्त शिवलिंग पर जल चढ़ता है, तो वह अपने भीतर की सारी नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर देता है और अपने जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा का लाभ प्राप्त करता है। दोस्तों इसके अलावे आप भगवन शिव के Havan भी कर सकते है भगवन इससे भी खुश होकर हमें आशिर्बाद प्रधान करता है।
दोस्तों इस पूजा को अगर हम आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखें तो यह हमें अहंकार को छोड़ने की सबसे बड़ी शिक्षा प्रदान करता है। जैसे जल निरंतर बहता है वैसे ही जीवन में हमारे विनम्रता और निरंतरता बनाए रखना है। शिवलिंग पर जल चढ़ाने की विधि हमें यह सिखाती है की सच्ची भक्ति दिखाए से नहीं बल्कि भावना से होती है और हम इसी प्रकार भगवान शिव की आराधना करके एवं उनकी सच्ची श्रद्धा से पूजा करके हम आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
क्या घर पर रोज़ शिवलिंग पर जल चढ़ाना शुभ होता है?
हाँ, घर पर रोज़ शिवलिंग पर जल चढ़ाना शुभ माना जाता है, बशर्ते यह श्रद्धा और शुद्धता के साथ किया जाए। प्रतिदिन जल अर्पण करने से मन शांत रहता है और नकारात्मक विचारों में कमी आती है। यदि रोज़ पूजा संभव न हो, तो केवल जल और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र से की गई सरल पूजा भी पूर्ण फल देती है। भगवान शिव भाव के भूखे हैं, इसलिए नियमितता से अधिक भावना महत्वपूर्ण मानी जाती है।
शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय कौन-सी सबसे आम गलती नहीं करनी चाहिए?
सबसे आम गलती है जल्दबाज़ी और बिना भावना के जल चढ़ाना। कई लोग जल को तेज़ धार से चढ़ा देते हैं या पूजा के समय मन में नकारात्मक विचार रखते हैं। इसके अलावा प्लास्टिक के बर्तन का प्रयोग करना और बिना स्नान के पूजा करना भी गलत माना जाता है। शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय शांति, स्वच्छता और श्रद्धा का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।
क्या बिना मंत्र के शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भी फल मिलता है?
हाँ, बिना मंत्र के भी यदि श्रद्धा से शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाए, तो फल अवश्य मिलता है। मंत्र पूजा को प्रभावशाली बनाते हैं, लेकिन भगवान शिव केवल सच्चे भाव को ही सबसे अधिक महत्व देते हैं। यदि कोई व्यक्ति मंत्र नहीं जानता, तो मन में शिव का स्मरण करते हुए जल अर्पित करना भी पूर्ण पूजा माना जाता है।
शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद क्या करना चाहिए?
शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद कुछ क्षण शांत मन से खड़े रहकर भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए। इसके बाद “ॐ नमः शिवाय” का जप या शिव चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। अंत में शिवजी से शांति, सद्बुद्धि और जीवन में सही मार्ग की प्रार्थना करनी चाहिए। पूजा के बाद क्रोध या जल्दबाज़ी से बचना भी आवश्यक होता है।
